दिल्ली 13 जुलाई: सोशल मीडिया पर भारतीय ट्रेन के एक कोच के अंदर पूजा-अर्चना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पुजारी ट्रेन के अंदर फर्श पर बैठकर रुद्राभिषेक करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान कई श्रद्धालु भी पूजा में शामिल दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने रेलवे व्यवस्था और ट्रेन के अंदर धार्मिक आयोजन को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। वायरल वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किया गया था। क्लिप में देखा जा सकता है कि एक ट्रेन कोच के अंदर धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है। पुजारी भगवान शिव की पूजा करते हुए मंत्रोच्चार कर रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद लोग पूजा में भाग ले रहे हैं। वीडियो में कई श्रद्धालु सफेद कपड़े पहने हुए दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या सामान्य यात्री कोच के अंदर इस तरह का आयोजन किया जा सकता है। कुछ लोगों ने इसे रेलवे नियमों से जोड़कर सवाल किए, जबकि कुछ ने इसे निजी धार्मिक आयोजन बताया। मामला चर्चा में आने के बाद नॉर्दर्न रेलवे ने इस संबंध में सफाई जारी की। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह कोई सामान्य यात्री कोच नहीं था, बल्कि एक निजी तौर पर बुक की गई सैलून कार थी। रेलवे के अनुसार, इस कोच को आईआरसीटीसी के माध्यम से व्यावसायिक बुकिंग के तहत आवंटित किया गया था।
नॉर्दर्न रेलवे ने बताया कि सैलून कार एक विशेष प्रकार की रेलवे सुविधा है, जिसे यात्री या समूह निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी यात्रा के लिए बुक कर सकते हैं। इस तरह की बुकिंग में यात्रियों को अपनी यात्रा की सुविधा के अनुसार कोच उपलब्ध कराया जाता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, वायरल वीडियो में दिखाई दे रही पूजा निजी यात्रा के दौरान की गई थी। इसमें रेलवे की ओर से किसी सार्वजनिक ट्रेन कोच या नियमित यात्री डिब्बे में धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई थी।
रिपोर्ट रेलवे की सफाई के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो में दिख रहा कोच सामान्य ट्रेन सेवा का हिस्सा नहीं था। यह एक निजी बुकिंग वाला सैलून कोच था, जिसमें यात्रा कर रहे लोगों ने अपनी धार्मिक गतिविधि की थी। रेलवे सैलून कार की सुविधा का इस्तेमाल आमतौर पर विशेष यात्राओं, पर्यटन समूहों या निजी आयोजनों के लिए किया जाता है। इसके लिए यात्रियों को रेलवे और आईआरसीटीसी की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है और शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कई बार अधूरी जानकारी के साथ सामने आते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। इस मामले में भी शुरुआत में कई लोगों ने इसे सामान्य ट्रेन कोच समझा, लेकिन रेलवे की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद तस्वीर साफ हुई। रेलवे ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी वास्तविकता की जांच जरूर करें। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी जानकारी को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार करना जरूरी है। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कुछ लोग इसे निजी धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग रेलवे सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि रेलवे की सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पूजा कार्यक्रम निजी तौर पर बुक किए गए सैलून कोच में आयोजित किया गया था।