पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक कथित शपथ ग्रहण समारोह को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण के कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी की बात कही जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक, इस कथित समारोह के दौरान रेखा गुप्ता ने कहा कि वह बंगाल की बेटियों के लिए बेहद खुश हैं, जिन्होंने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। उनके बयान को लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने “15 साल तक जुल्म सहने” की बात का उल्लेख किया, हालांकि इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
बताया जा रहा है कि यह कार्यक्रम कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया, जहां बड़े राजनीतिक आयोजन की चर्चा पहले से चल रही थी। इसी मंच से कथित तौर पर नई सरकार के गठन और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर घोषणाएं सामने आने की बात कही जा रही है। इस कथित कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री की मौजूदगी के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि किसी भी आधिकारिक एजेंसी, राजभवन या निर्वाचन आयोग ने इस तरह के शपथ ग्रहण या उसमें शामिल नेताओं की पुष्टि नहीं की है।
राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हलचल जरूर देखी जा रही है, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के लिए स्पष्ट औपचारिक प्रक्रिया होती है। इसमें राज्यपाल की मंजूरी, विधानसभा में बहुमत का समर्थन और आधिकारिक अधिसूचना शामिल होती है। फिलहाल ऐसी किसी प्रक्रिया की पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि इसे बड़े राजनीतिक आयोजन के लिए तैयार किया गया था। यह मैदान लंबे समय से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रैलियों और जनसभाओं का प्रमुख स्थल रहा है, जहां कई बड़े आंदोलन और सभाएं आयोजित होती रही हैं।
हालांकि इस कथित शपथ ग्रहण और उसमें दिए गए बयानों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या पुष्टि उपलब्ध नहीं है। राज्य सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से भी इस पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की ओर से भी इस कथित घटनाक्रम पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक अस्पष्ट बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे राजनीतिक दावों में आधिकारिक पुष्टि बेहद जरूरी होती है, क्योंकि बिना संवैधानिक प्रक्रिया के किसी भी प्रकार के शपथ ग्रहण की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल पूरे मामले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, यह केवल आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।