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नई दिल्ली, 08 मई । दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति प्रो. योगेश सिंह शुक्रवार को वाइस रीगल लॉज स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित दिल्ली विश्वविद्यालय खेल परिषद (डीयूएससी) के ‘वार्षिक खेल पुरस्कार समारोह 2026’ में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि एनईपी-2020 के तहत खेलों को शिक्षा का हिस्सा तो बनाया गया है, लेकिन जरूरत है कि खेल हर विद्यार्थी की ज़िंदगी का भी हिस्सा भी बनें। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय खेल परिषद को भी इस पर काम करना चाहिए और प्रत्येक प्रिंसिपल को अपने कॉलेजों में स्पोर्ट्स कोच नियुक्त करें।
कुलपति ने कहा कि खेल हमें जितना सिखाते हैं, हारना सिखाते हैं, गिरना सिखाते हैं और उठना भी सिखाते हैं। इसलिए खेलों का बहुत महत्व है। जिस चीज के इतने फायदे हों, उसे एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी से कोर सब्जेक्ट में लेकर आएँ, स्पोर्ट्स को कोर में होना चाहिए।
प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि 21वीं सदी का भारत फेसबुक, इंस्टाग्राम और इंटरनेट का भारत है। जिस देश में इतना ज्यादा स्क्रीन टाइम हो, वहां स्पोर्ट्स को जीवन का हिस्सा बनाना चुनौती तो है, इसलिए रणनीति बनाना जरूरी है।
कुलपति ने कहा कि आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य एक मुख्य चुनौती बन रहा है। हमारा पूरा शिक्षा तंत्र प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है। जब बच्चे इस तंत्र से बाहर सामाजिक और व्यावहारिक जीवन में आते हैं तो उस सहभागिता और सहकार्यता की बात होती है, जो उन्हें शिक्षा में सिखाया ही नहीं गया होता। इसलिए सामूहिक खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। सामूहिक खेलें सहभागिता का बेहतर उपकरण हैं।
समारोह के दौरान कुलपति ने डीयू के उन विद्यार्थियों को पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में सराहनीय प्रदर्शन किया है।
कार्यक्रम के आरंभ में डीयू खेल परिषद के निदेशक डॉ अनिल कलकल ने परिषद की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में डीयू के प्रदर्शन पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो. बलराम पाणी, डीयू के दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो और रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता सहित अनेकों अधिकारी, प्रिंसिपल, शिक्षक एवं गैर शिक्षक कर्मी तथा हजारों विद्यार्थी उपस्थित रहे।