खून की कमी दूर करने में मदद करेगा ये डाइट प्लान

Posted on: 2026-10-24


आजकल बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और पोषक तत्वों की कमी के कारण लोगों में हीमोग्लोबिन कम होने की समस्या आम होती जा रही है। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और चेहरे पर पीलापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य थकावट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक हीमोग्लोबिन कम रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में समय पर जांच और सही खानपान बेहद जरूरी है।

बीएलके मैक्स हॉस्पिटल के डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल के अनुसार, हीमोग्लोबिन के सामान्य स्तर को बनाए रखने के लिए संतुलित और पोषक आहार का सेवन करना आवश्यक है। खासकर आयरन, विटामिन बी12, फोलेट और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि शरीर में आयरन की कमी है, तो खानपान में उचित बदलाव करने से उसे पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सिर्फ सात दिनों में हीमोग्लोबिन पूरी तरह सामान्य हो जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है। खून की कमी का कारण और गंभीरता जानने के लिए चिकित्सकीय जांच भी जरूरी होती है।

शरीर में हीमोग्लोबिन क्यों जरूरी है? हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक विशेष प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी होने पर शरीर के ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके कारण व्यक्ति को जल्दी थकान महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर ठंडे रहना और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

हीमोग्लोबिन कम होने की कई वजहें हो सकती हैं। इनमें आयरन की कमी, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी, अधिक रक्तस्राव, कुछ पुरानी बीमारियां और शरीर में पोषक तत्वों का ठीक से अवशोषण नहीं होना शामिल हैं। पहले दिन: पालक और विटामिन सी से करें शुरुआत सप्ताह के पहले दिन सुबह के नाश्ते में बेसन या मूंग दाल का चीला लिया जा सकता है। इसके साथ अमरूद या संतरा जैसे विटामिन सी से भरपूर फल शामिल करें। दोपहर के भोजन में पालक की सब्जी, दाल और रोटी खाएं। रात में सब्जियों के साथ मूंग दाल की खिचड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

पालक में नॉन-हीम आयरन और फोलेट मौजूद होता है। इसके साथ विटामिन सी युक्त भोजन लेने से वनस्पति स्रोतों से मिलने वाले आयरन का अवशोषण बेहतर हो सकता है। दूसरे दिन: चना और अंकुरित अनाज का सेवन दूसरे दिन सुबह अंकुरित मूंग या चने की अच्छी तरह पकी हुई चाट खाई जा सकती है। इसमें नींबू का रस मिलाने से स्वाद के साथ विटामिन सी भी मिलेगा। दोपहर में चने की दाल, हरी सब्जियां और रोटी लें।

शाम को मुट्ठी भर भुना चना खाया जा सकता है। रात में राजमा या अन्य दाल के साथ चावल और सब्जियां शामिल करें। चना, राजमा और दालें प्रोटीन तथा आयरन के अच्छे वनस्पति स्रोत हैं। तीसरे दिन: फल और सूखे मेवे बनाएं डाइट का हिस्सा तीसरे दिन नाश्ते में दलिया, कुछ किशमिश और सीमित मात्रा में बादाम खाए जा सकते हैं। साथ में कोई विटामिन सी युक्त फल लें। दोपहर में सोयाबीन, टोफू या दाल से बनी सब्जी के साथ रोटी खाएं। शाम को अमरूद या संतरा लिया जा सकता है।

रात के भोजन में सब्जियों और दाल से बना संतुलित आहार शामिल करें। खजूर और किशमिश में कुछ मात्रा में आयरन होता है, लेकिन केवल इनका सेवन करने से एनीमिया का इलाज नहीं होता। इन्हें संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाना चाहिए। चौथे दिन: आयरन और प्रोटीन पर दें ध्यान चौथे दिन नाश्ते में अंडा या पनीर के साथ रोटी और फल लिया जा सकता है।

दोपहर में हरी सब्जियां, दाल और सलाद शामिल करें। मांसाहारी लोग भोजन में अच्छी तरह पकी मछली या कम वसा वाला मांस शामिल कर सकते हैं। इनमें मिलने वाला हीम आयरन शरीर में अपेक्षाकृत आसानी से अवशोषित होता है। शाकाहारी लोग इसके विकल्प के रूप में सोयाबीन, टोफू, राजमा और आयरन से समृद्ध अनाज खा सकते हैं।

पांचवें दिन: विटामिन बी12 और फोलेट लें पांचवें दिन सुबह दूध, दही या विटामिन बी12 से समृद्ध खाद्य पदार्थों को नाश्ते में शामिल करें। दोपहर में ब्रोकली, मटर, चना और अन्य हरी सब्जियां खाएं।विटामिन बी12 और फोलेट लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। दूध, अंडे, मछली और मांस विटामिन बी12 के स्रोत हैं। पूरी तरह शाकाहारी आहार लेने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से बी12 सप्लीमेंट लेना पड़ सकता है। छठे दिन: दाल, हरी सब्जियां और फल छठे दिन सुबह मूंग दाल का चीला और अमरूद लें। दोपहर में मसूर दाल, रोटी और हरी सब्जी खाएं।शाम को संतरा या मौसमी जैसे फल शामिल किए जा सकते हैं।

रात में सब्जियों से बनी खिचड़ी और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ लें।यह भोजन शरीर को आयरन, फोलेट, प्रोटीन और विटामिन सी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। सातवें दिन: संतुलित आहार से पूरी करें सप्ताह की योजना सातवें दिन नाश्ते में आयरन से समृद्ध दलिया या अनाज के साथ फल लें। दोपहर में राजमा, चावल और नींबू वाला सलाद खाएं।शाम को भुने चने या सीमित मात्रा में मेवे खा सकते हैं।

रात में दाल, रोटी और मौसमी सब्जियां शामिल करें।इस तरह सात दिन तक अलग-अलग पोषक खाद्य पदार्थ लेने से भोजन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। जरूरत के अनुसार इस योजना को आगे भी जारी रखा जा सकता है। खाने के तुरंत बाद चाय-कॉफी से बचें आयरन की कमी वाले लोगों को भोजन के आसपास चाय और कॉफी के सेवन पर ध्यान देना चाहिए। इनमें मौजूद कुछ यौगिक आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।इसके अलावा आयरन की दवा के साथ कैल्शियम सप्लीमेंट लेने का समय भी चिकित्सक की सलाह से तय करना चाहिए।

कब जरूरी है डॉक्टर से संपर्क करना? यदि लगातार कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जरूरत के अनुसार सीबीसी, फेरिटिन, विटामिन बी12 और अन्य जांच कराई जा सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज उसके वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया में कई बार आयरन की दवाओं की जरूरत पड़ती है और शरीर के आयरन भंडार को भरने में कई महीने लग सकते हैं। सही खानपान स्वस्थ शरीर और सामान्य हीमोग्लोबिन स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सात दिनों की इस डाइट योजना को अच्छी शुरुआत के तौर पर अपनाया जा सकता है, लेकिन गंभीर एनीमिया में सिर्फ घरेलू भोजन पर निर्भर रहना उचित नहीं है।