दिनभर के काम, तनाव और थकान के बीच सिर में दर्द होना सामान्य शिकायत है। कई बार लोग इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ लोग हर तेज सिर दर्द को माइग्रेन मान लेते हैं। सही पहचान के लिए दर्द की जगह और तीव्रता के साथ उसके साथ आने वाले लक्षणों को भी समझना जरूरी है। पानी की कमी, भोजन छोड़ना, तनाव और आंखों पर लगातार जोर पड़ना सिर दर्द के कारण हो सकते हैं। बार-बार होने वाले दर्द में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
सिर दर्द और माइग्रेन को पूरी तरह अलग समस्याएं समझना भी सही नहीं है। सिर दर्द एक लक्षण है, जबकि माइग्रेन ऐसी स्थिति है जिसमें सिर दर्द के साथ अन्य परेशानियां हो सकती हैं। रोजमर्रा में जिसे सामान्य सिर दर्द कहा जाता है, वह अक्सर तनाव से जुड़ा टेंशन टाइप सिर दर्द होता है। हालांकि, प्रत्येक सिर दर्द को इसी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। माइग्रेन के अटैक व्यक्ति की काम करने की क्षमता, पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।
टेंशन टाइप सिर दर्द में आमतौर पर सिर के दोनों तरफ दर्द या दबाव महसूस होता है। व्यक्ति को ऐसा लग सकता है जैसे सिर के चारों ओर कोई पट्टी कस दी गई हो। दर्द चेहरे या गर्दन तक भी महसूस हो सकता है। इसकी तीव्रता सामान्यतः हल्की से मध्यम रहती है। प्रभावित हिस्से को छूने पर संवेदनशीलता भी महसूस हो सकती है। आमतौर पर चलने या रोजमर्रा के काम करने से यह दर्द बहुत अधिक नहीं बढ़ता और व्यक्ति अपनी सामान्य गतिविधियां जारी रख सकता है।
सिर दर्द की अवधि को लेकर भी सावधानी जरूरी है। सामान्य सिर दर्द हमेशा पांच मिनट से चार घंटे के भीतर समाप्त हो जाएगा, ऐसा निश्चित नियम नहीं है। टेंशन टाइप सिर दर्द कम से कम लगभग 30 मिनट रह सकता है और कभी कई दिनों तक भी बना रह सकता है। इसलिए केवल दर्द कितनी देर रहा, इसके आधार पर उसकी पहचान नहीं करनी चाहिए। दर्द का स्वरूप, उसकी आवृत्ति और उससे जुड़ी दूसरी शिकायतें भी महत्वपूर्ण हैं। लगातार या बार-बार होने वाला दर्द डॉक्टर को बताना चाहिए।
माइग्रेन में दर्द अक्सर धड़कन जैसा महसूस होता है और सिर के एक तरफ अधिक हो सकता है। इसकी तीव्रता मध्यम से गंभीर हो सकती है। चलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी सामान्य शारीरिक गतिविधियों से भी परेशानी बढ़ सकती है। दर्द के साथ मतली, उल्टी तथा रोशनी और आवाज के प्रति अधिक संवेदनशीलता माइग्रेन की पहचान में मदद करने वाले संकेत हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए काम जारी रखना कठिन हो सकता है। माइग्रेन का सिर दर्द आमतौर पर चार से 72 घंटे तक रह सकता है। दोनों के बीच फर्क समझने के लिए यह देखना उपयोगी है कि दर्द दैनिक जीवन को कितना प्रभावित कर रहा है। सिर में दबाव होने के बावजूद सामान्य काम कर पाना टेंशन टाइप सिर दर्द में अधिक देखा जाता है। इसके विपरीत, धड़कता दर्द, गतिविधियों से बढ़ती परेशानी और मतली जैसी शिकायतें माइग्रेन की ओर संकेत कर सकती हैं। हालांकि, ये संकेत स्वयं निदान करने का आधार नहीं हैं। अलग-अलग लोगों में अनुभव अलग हो सकता है और सही पहचान के लिए लक्षणों का पूरा इतिहास जरूरी होता है।
कुछ लोगों को माइग्रेन के साथ ‘ऑरा’ नाम के लक्षण होते हैं। इनमें चमकती रोशनी या टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं दिखाई देना और झनझनाहट महसूस होना शामिल हो सकता है। हर माइग्रेन में ऑरा होना जरूरी नहीं है। वहीं, अचानक पहली बार बोलने में कठिनाई, शरीर में कमजोरी या दृष्टि खोने जैसी समस्या को सामान्य ऑरा मानकर टालना ठीक नहीं है। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। पहले से माइग्रेन होने के बावजूद नए या असामान्य लक्षणों की जांच जरूरी है। NHS तनाव, नींद की कमी, थकान, पानी कम पीना और भोजन छोड़ना सिर दर्द या माइग्रेन से संबंधित हो सकते हैं।
अपने लक्षणों का रिकॉर्ड रखना उपयोगी है। डायरी में दर्द शुरू होने का समय, अवधि, तीव्रता, साथ के लक्षण और इस्तेमाल की गई दवा लिखी जा सकती है। इससे चिकित्सक को समस्या समझने और संभावित ट्रिगर पहचानने में मदद मिलती है। पर्याप्त नींद, नियमित भोजन और पानी पीने जैसी आदतें भी प्रबंधन का हिस्सा हैं। बार-बार दर्द निवारक दवाएं लेना स्वयं सिर दर्द बढ़ने का कारण बन सकता है। सिर दर्द बार-बार होने लगे, बढ़ता जाए या सामान्य उपायों से राहत न मिले तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अचानक शुरू हुआ बेहद तेज दर्द, तेज बुखार के साथ गर्दन अकड़ना, बेहोशी, दौरा, दृष्टि में कमी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी तत्काल जांच की जरूरत वाले संकेत हैं। उपचार दर्द के प्रकार और उसकी आवृत्ति के अनुसार तय होता है। माइग्रेन में अटैक के दौरान राहत और भविष्य के अटैक कम करने के लिए अलग उपचार उपलब्ध हैं। केवल दर्द की तीव्रता देखकर दवा चुनना उचित नहीं है।