भारत का
कोयला आयात अब ज़्यादातर स्टील पर केंद्रित होता जा रहा है। FY2025-26 में मेटलर्जिकल कोयले
(इस्पात बनाने में इस्तेमाल होने वाला कोयला) का आयात तेज़ी से बढ़ा है, जबकि थर्मल कोयले (बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाला कोयला) के आयात पर
निर्भरता कम हुई है। भारत ने FY2025-26 में लगभग 244.2
मिलियन टन नॉन-कोकिंग और मेटलर्जिकल कोयले का आयात किया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 245.3 मिलियन टन के
मुकाबले लगभग उतना ही है। हालाँकि, आयात के कुल आँकड़े में
स्थिरता के बावजूद, आयात की संरचना में एक बड़ा बदलाव आया है।
कोकिंग कोयले का आयात साल-दर-साल 12.4 प्रतिशत बढ़कर 56.6 मिलियन टन से 63.7 मिलियन टन हो गया, जबकि पल्वराइज्ड कोल इंजेक्शन (PCI) का आयात 6.2
प्रतिशत बढ़कर 19.6 मिलियन टन से 20.9 मिलियन टन हो गया। इससे भारत का कुल मेटलर्जिकल कोयले का आयात FY2025-26
में 84.5 मिलियन टन तक पहुँच गया, जो एक साल पहले के 76.3 मिलियन टन से 10.4 प्रतिशत ज़्यादा है। इसमें देश के स्टील सेक्टर की लगातार माँग का भी
योगदान रहा।दक्षिण-एशियाई और प्रवासी इसके विपरीत, नॉन-कोकिंग
कोयले का आयात साल-दर-साल 5.5 प्रतिशत घटकर 169 मिलियन टन से 159.7 मिलियन टन रह गया, जो घरेलू कोयले की बेहतर उपलब्धता और आयातित थर्मल कोयले पर कम निर्भरता
को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आयात बास्केट धीरे-धीरे बिजली
सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले ईंधन से हटकर स्टील से जुड़े कच्चे माल की ओर बढ़
रहा है, जिससे भविष्य में कोयले के आयात का ट्रेंड बिजली की
माँग के बजाय स्टील के उत्पादन पर ज़्यादा निर्भर करेगा।
रिपोर्ट
में कहा गया है, "आयात की अतिरिक्त माँग अब मेटलर्जिकल सेगमेंट पर केंद्रित है, जहाँ घरेलू आपूर्ति गुणवत्ता की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाती है।"
यह बदलता पैटर्न भारत के सप्लायर मिक्स को भी बदल रहा है। रूस FY2025-26 में भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते कोयला सप्लायर्स में से एक बनकर उभरा है,
जिसका शिपमेंट साल-दर-साल 13.1 प्रतिशत बढ़कर 28.3
मिलियन टन से 32 मिलियन टन हो गया है। भारत को
रूस से होने वाली कोकिंग कोल की सप्लाई 12.1% बढ़कर 9.2
मिलियन टन हो गई, जबकि रूस से नॉन-कोकिंग कोल
का आयात 20% बढ़कर 7.5 मिलियन टन हो
गया। इससे पता चलता है कि मेटलर्जिकल और थर्मल कोल, दोनों ही
सेगमेंट में रूस की मौजूदगी बढ़ रही है।वहीं, प्रीमियम
कोकिंग कोल के लिए ऑस्ट्रेलिया भारत का मुख्य स्रोत बना रहा और भारत को उसका कुल
कोल एक्सपोर्ट 9.3% बढ़कर 43 मिलियन टन
हो गया। इस साल ऑस्ट्रेलिया से कोकिंग कोल का शिपमेंट 13.4% बढ़कर
34.3 मिलियन टन हो गया।