MCD दिल्ली में लागू करेगा इंदौर का स्वच्छता मॉडल; फिर बढ़ सकते हैं कूड़े के पहाड़, LG ने जताई चिंता

Posted on: 2026-07-28


दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. नगर निगम (MCD) की समीक्षा बैठक में सामने आया कि राजधानी में प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 50 प्रतिशत कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण नहीं हो रहा और बड़ी मात्रा में कचरा बिना प्रसंस्करण के सीधे डंपिंग साइटों पर पहुंच रहा है.

यह स्थिति तब है जब निगम गाजीपुर, भलस्वा और ओखला के कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के लिए बायोमाइनिंग और रिमेडिएशन अभियान चला रहा है. हालात को देखते हुए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इंदौर के सफल कचरा प्रबंधन मॉडल को दिल्ली के एक जोन में पायलट परियोजना के रूप में लागू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं.

आधा कचरा अब भी पहुंच रहा है डंपिंग साइटों पर

सोमवार को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि दिल्ली में हर दिन निकलने वाले कचरे का बड़ा हिस्सा अब भी वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित नहीं हो रहा है.

आंकड़ों के अनुसार करीब 50 प्रतिशत कचरा स्रोत स्तर पर अलग नहीं किया जा रहा. इसके कारण सूखा और गीला कचरा एक साथ डंपिंग साइटों तक पहुंच रहा है, जिससे उसके निस्तारण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया प्रभावित होती है. अधिकारियों ने आशंका जताई कि यदि यह स्थिति जारी रही तो पुराना कचरा हटाने के प्रयासों के बावजूद नए कचरे का दबाव बढ़ता रहेगा.

बैठक में उपराज्यपाल ने अधिकारियों को इंदौर नगर निगम के कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दिए. इंदौर मॉडल में घर-घर से अलग-अलग श्रेणी का कचरा संग्रह, स्रोत स्तर पर पृथक्करण और अलग-अलग प्रकार के कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण प्रमुख आधार हैं. फिलहाल MCD ने यह तय नहीं किया है कि किस जोन में पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा. इसके लिए समयसीमा, लागत और कार्ययोजना पर अभी फैसला होना बाकी है.

कूड़े के पहाड़ हटाने की कोशिश पर खतरा

दिल्ली नगर निगम गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइटों पर जमा वर्षों पुराने कचरे को हटाने का अभियान चला रही है. हालांकि उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि यदि रोजाना बड़ी मात्रा में नया कचरा इन्हीं स्थलों पर पहुंचता रहा तो लैंडफिल हटाने की पूरी कवायद का प्रभाव सीमित रह जाएगा. इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डंपिंग साइटों पर पहुंचने वाले कचरे और उसके प्रसंस्करण की दैनिक निगरानी की जाए.

जलभराव और डेंगू की तैयारियों की भी समीक्षा

बैठक में मानसून के दौरान जलभराव रोकने और नालों की सफाई की स्थिति की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने डेंगू और मलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए मच्छरों की रोकथाम और फॉगिंग संबंधी उपायों की जानकारी दी. दिल्ली के कई इलाकों में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव को लेकर भी विशेष चर्चा हुई और संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए.

सर्दियों के प्रदूषण पर भी फोकस

उपराज्यपाल ने MCD को सर्दियों से पहले विशेष वायु प्रदूषण कार्ययोजना तैयार करने को कहा है. खराब और टूटी हुई सड़कों को धूल प्रदूषण का बड़ा कारण बताते हुए सड़क मरम्मत और रीसर्फेसिंग कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा MCD के अधीन आने वाली सड़कों का सुरक्षा ऑडिट कराने का भी फैसला लिया गया है, ताकि दुर्घटना संभावित और जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर उन्हें ठीक किया जा सके.