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कांकेर, 20 जून । छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रावघाट लौह अयस्क परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत रावघाट माइंस से लेकर रेलवे स्टेशन तक लौह अयस्क के सुगम परिवहन के लिए घने जंगल के बीच लगभग दो किलोमीटर लंबी एक नई सड़क का निर्माण किया जा रहा था। इस निर्माण कार्य को अंजाम देने के लिए बिना किसी अनुमति के सैकड़ों पेड़ों की कटाई कर दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम ने आज शनिवार काे निर्माण स्थल पर छापेमारी कर प्रारंभिक जांच और पंचनामा तैयार करने के बाद निर्माण कार्य में अवैध रूप से संलिप्त आठ भारी वाहनों (जेसीबी, डंपर आदि) को जब्त कर लिया है।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि संबंधित कार्य एजेंसी द्वारा वन विभाग के पास केवल 'प्रस्ताव या आवेदन' जमा किया गया था। विभाग द्वारा अंत अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन एजेंसी ने औपचारिकता पूरी होने से पहले ही जंगलों को साफ करना शुरू कर दिया। वन मंडलाधिकारी भानुप्रतापपुर ने स्पष्ट किया है कि पेड़ों की कटाई पूरी तरह से अवैध थी। विभाग अब पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के तहत पीओआर दर्ज कर कार्रवाई की तैयारी में है।
रावघाट लौह अयस्क परियोजना भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के लिए लाइफलाइन मानी जाती है। दल्लीराजहरा की माइंस में लोहा खत्म होने के बाद भिलाई स्टील प्लांट की निर्भरता इसी रावघाट परियोजना पर है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में रेल लाइन और सड़क कनेक्टिविटी का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। नियमानुसार, किसी भी वन भूमि पर गैर-वानिकी कार्य या सड़क निर्माण के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन्यजीव और पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति) की एक जटिल और अनिवार्य प्रक्रिया होती है।
बीएसपी प्रबंधन के जीएम अरुण कुमार का दावा है कि उनकी डीएफओ से चर्चा हुई है। सभी जरूरी क्लीयरेंस लिए गए हैं। हालांकि, वन विभाग के कड़े रुख और गाड़ियों की जब्ती ने इस दावे की पोल खोल दी है। स्थानीय रावघाट संघर्ष समिति और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, समिति ने माइंस से जुड़े सभी कार्यों को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है।