पाटेश्वर धाम को कथित कब्जे से मुक्त कराने आज बालोद में आदिवासियों का प्रदर्शन

Posted on: 2026-06-20


रायपुर, 20 जून । छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पाटेश्वर धाम को कथित कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर आज आदिवासी समाज बड़ा प्रदर्शन करने जा रहा है । जिसे देखते हुए प्रशासन ने जिले की सीमा को सील कर दिया है।

आदिवासी संगठनों का आरोप है कि डौंडीलोहारा ब्लॉक के तुएगोंदी-जामड़ी क्षेत्र में आरक्षित वन भूमि पर बिना ग्राम सभा की अनुमति के धार्मिक निर्माण कराए जा रहे हैं। सर्व आदिवासी समाज के अनुसार, लगभग 12 एकड़ वन भूमि पर एक स्वयंभू बाबा द्वारा अतिक्रमण किया गया है, जिससे पारंपरिक देवस्थल नष्ट हो रहे हैं। इससे पहले 1 जून को, 10,000 से अधिक आदिवासियों ने बालोद कलेक्ट्रेट का घेराव किया था, जिसके हिंसक होने पर पुलिस को बैरिकेड्स तोड़ने पड़े थे। तब प्रशासन ने 20 जून तक का समय मांगा था।, जिसके बाद उन्होंने इसी दिन आंदोलन और कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। तीन हजार से ज्यादा पुलिस बल तैनात किया गया है । प्रदर्शन को देखते हुए जामड़ीपाट सहित संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया है और आसपास के 20 गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

आदिवासियों की मुख्य मांग पाटेश्वर धाम को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराए जाने की है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई के लिए 20 जून तक का समय मांगा था, जिसके बाद उन्होंने इसी दिन आंदोलन और एक्शन की चेतावनी दी थी।सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष तुकाराम कोर्राम ने बताया कि डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम तुएगोंदी और जामड़ी क्षेत्र में रिजर्व फॉरेस्ट भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा, निर्माण और खनन किया जा रहा है। उनका आरोप है कि आदिवासी समुदाय के पवित्र देवस्थल पर भी कब्जा कर लिया गया है, जहां सालों से पूजा-अर्चना होती रही है। गांव की भूमि पर विकसित किए जा रहे पाटेश्वर धाम में लगातार निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र के पारंपरिक आदिवासी आस्था स्थलों का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।

प्रदर्शन को लेकर पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।