नई दिल्ली 18 जून: दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल एक अंतर-राज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन के दौरान पांच दिन से लेकर चार महीने तक की उम्र के पांच नवजात बच्चों को बचाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें गिरोह का कथित सरगना भी शामिल है - एक महिला जो खुद को डॉक्टर बताती थी। इस महिला की पहचान विवेकी कपूर के तौर पर हुई है, जो एक नर्सिंग होम की मालकिन है।
पुलिस अभी उसके मेडिकल दस्तावेजों और इस बात की जांच कर रही है कि क्या वह वास्तव में एक क्वालिफाइड डॉक्टर है। जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों को दिल्ली और राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह कथित तौर पर बच्चों के जन्म के रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जीवाड़ा करके उन्हें दूसरे राज्यों से लाता था। इसके बाद इन बच्चों को इच्छुक माता-पिता को लाखों रुपये में बेच दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि कुछ बच्चों को हरियाणा में भी बेचे जाने की खबर है।
आरोपियों से पूछताछ अभी चल रही है। पिछले महीने, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में पुलिस ने मानव तस्करी के ऐसे ही एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था और 36 मजदूरों व छह नाबालिग बच्चों को बचाया था। पुलिस और श्रम विभाग की एक संयुक्त टीम ने एक होटल में छापेमारी की और उन मजदूरों व नाबालिगों को बचाया, जिन्हें कथित तौर पर गुजरात ले जाने की तैयारी की जा रही थी। यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी। पुलिस को खबर मिली थी कि चक्रधरपुर के एक होटल में बड़ी संख्या में पुरुष और महिला मजदूर और बच्चे रखे गए हैं, और उन्हें दूसरे राज्य भेजने की तैयारी चल रही है।
तेजी से कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई। इस टीम में पुलिस, श्रम विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और चाइल्डलाइन के अधिकारी शामिल थे। छापेमारी के दौरान होटल में कई मजदूर और बच्चे मिले। पुलिस ने एक ट्रैवल कंपनी की बस भी जब्त की, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर मजदूरों को गुजरात ले जाने के लिए किया जाना था। बचाए गए छह नाबालिगों में पांच लड़के और एक लड़की शामिल थी। बाल कल्याण समिति (CWC) के निर्देशों के बाद, सभी बच्चों को चाइल्डलाइन चाईबासा को सौंप दिया गया। बाकी मजदूरों से भी पूछताछ की जा रही है।