सरकारी गाड़ियों पर सीमा, सीएम रेखा गुप्ता भी दायरे में शामिल

Posted on: 2026-05-13


दिल्ली  13 मई: दुनिया भर में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की किफायत बरतने की अपील के बाद दिल्ली में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी क्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने मंगलवार को सरकारी गाड़ियों के उपयोग पर सीमा तय करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप लिया गया है, जिसका उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। इस नई व्यवस्था के तहत दिल्ली सरकार के मंत्रियों, विधायकों, सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा सरकारी वाहनों के उपयोग को सीमित किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने स्वयं को भी इन पाबंदियों के दायरे में शामिल करने की घोषणा की है, जिसे एक प्रतीकात्मक और अनुशासनात्मक कदम माना जा रहा है।

सरकारी निर्देशों के अनुसार अब दिल्ली सरकार (Delhi) के विभिन्न विभागों में अनावश्यक वाहन उपयोग को कम किया जाएगा और जहां संभव हो, वहां कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन जैसे बसों और मेट्रो सेवाओं के उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि राजधानी में ट्रैफिक दबाव भी कम होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों को देखते हुए किए गए आह्वान के बाद यह जरूरी हो गया है कि हर स्तर पर जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि “राष्ट्र पहले” की भावना के साथ सभी नागरिकों को इस दिशा में सहयोग करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की कि वे निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि मेट्रो और बस सेवाएं दिल्ली की लाइफलाइन हैं और इनका उपयोग बढ़ाने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि सड़क पर भीड़ भी कम होगी। अपने सोशल मीडिया संदेश में मुख्यमंत्री ने लिखा कि लोगों को जहां तक संभव हो कारपूलिंग अपनानी चाहिए और गैर-जरूरी निजी वाहन उपयोग से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा की बचत केवल सरकार की नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

इस कदम को प्रशासनिक सुधार और पर्यावरणीय जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्तर पर इस तरह की सख्ती और जागरूकता अभियान लगातार चलते रहे, तो इससे ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और शहरों में प्रदूषण भी घट सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की नीतियों को प्रभावी बनाने के लिए मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और बेहतर शहरी प्रबंधन की आवश्यकता होगी। इसके बिना केवल अपीलों से लंबे समय तक बड़े बदलाव संभव नहीं हैं। फिलहाल दिल्ली सरकार ने सभी विभागों को निर्देश जारी कर दिए हैं और आने वाले दिनों में इस नीति के प्रभावों की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऊर्जा बचत और संसाधनों के संतुलित उपयोग को एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए।