आयुर्वेद में प्राचीन समय से ही अनेक औषधीय पौधों का उपयोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए होता आ रहा है। इन्हीं में सबसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधा मुलेठी है, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत गुणकारी माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम 'ग्लाइसीराइजा ग्लैब्रा' है और यह 'लेगुमिनोसे' परिवार से संबंधित है। यह एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से गले की खराश, खांसी और पाचन संबंधी समस्याओं के उपचार में किया जाता है।
इसे संस्कृत में यष्टिमधु के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में मुलेठी को एक प्रभावी प्राकृतिक औषधि माना गया है, क्योंकि इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, गले की खराश को दूर करने तथा श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक होती है। इसी कारण से मुलेठी का प्रयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं और घरेलू उपचारों में किया जाता है।
रहे यह एक बारहमासी पौधा है, जो हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है। मुलेठी वात और पित्त को संतुलित करने में प्रयोग किया जाता है। ये स्वाद में मीठी होती है और कई रोगों में राहत दिलाने में मदद करती है। मुलेठी की तासीर ठंडी होती है और स्वाद मीठा होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनो-मॉड्यूलेटर गुण होते हैं, जो कई बीमारियों में राहत देते हैं। हालांकि कफ की प्रवृत्ति होने पर इसे कम से कम लेना चाहिए।