SAIL के मुनाफे में करीब 315 फीसदी उछाल, वंदे भारत के पहियों की आपूर्ति में भी मजबूती

Posted on: 2026-11-01


देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी के शुद्ध मुनाफे में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 315 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान कंपनी ने उत्पादन और बिक्री के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही भारतीय रेलवे की वंदे भारत ट्रेनों के लिए पहियों की आपूर्ति को स्थिर करने में मिली सफलता ने कंपनी की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूती दी है। कंपनी के मुताबिक, बेहतर उत्पादन-विक्रय तालमेल, लागत नियंत्रण और उच्च मूल्य वाले इस्पात उत्पादों पर विशेष ध्यान देने से वित्तीय नतीजों में सुधार आया है।

सेल के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ बढ़कर 1,774 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 427 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी का परिचालन से राजस्व भी लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर 31,998 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 26,704 करोड़ रुपये था। कंपनी की बिक्री मात्रा में भी करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में सेल ने 5.16 मिलियन टन इस्पात की बिक्री की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.91 मिलियन टन था। वहीं, कच्चे इस्पात का उत्पादन 4.65 मिलियन टन से बढ़कर 4.85 मिलियन टन हो गया। ये आंकड़े कंपनी की उत्पादन क्षमता और बाजार में मांग के अनुरूप आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

कंपनी के बेहतर प्रदर्शन में उच्च मूल्य वाले उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण रही। पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में ऐसे उत्पादों की बिक्री मात्रा में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन उत्पादों पर ध्यान देने से कंपनी को बेहतर बाजार मूल्य और लाभप्रदता हासिल करने में मदद मिलती है। इसके अलावा सेल की खदानों ने भी तिमाही के दौरान अब तक का सर्वाधिक उत्पादन और बिक्री दर्ज की। इससे कंपनी के इस्पात संयंत्रों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ घरेलू बाजार में अतिरिक्त लौह अयस्क की बिक्री का अवसर भी मिला। कंपनी ने भंडार प्रबंधन, सामग्री की समय पर आपूर्ति और रेल तथा सड़क मार्ग से सीधे प्रेषण पर भी जोर दिया है।

रेलवे क्षेत्र में सेल की बढ़ती भूमिका इस प्रदर्शन का एक अहम पहलू है। वंदे भारत ट्रेनों के लिए पहियों की आपूर्ति को स्थिर करना कंपनी की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे देश में आधुनिक रेल परिवहन के लिए जरूरी उत्पादों की घरेलू आपूर्ति को मजबूती मिलती है। कंपनी ने भारतीय रेलवे को लंबी रेल पटरियों की आपूर्ति में भी वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान लंबी रेल पटरियों की आपूर्ति में सात प्रतिशत और व्हील्स एवं एक्सल की आपूर्ति में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे रेलवे के बुनियादी ढांचे और आधुनिक रेल परियोजनाओं में सेल की भागीदारी मजबूत होती दिखाई दे रही है।

सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. ए.के. पांडा के अनुसार, उत्पादन, बिक्री, खनन और लागत अनुकूलन पर एक साथ ध्यान देने से कंपनी को बेहतर परिणाम मिले हैं। कंपनी ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए कर्ज घटाने की दिशा में भी काम किया है। सितंबर 2026 तक कंपनी का कर्ज घटकर 20,583 करोड़ रुपये रह गया। आने वाले समय में सेल का लक्ष्य उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, सुरक्षा और उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान बनाए रखना होगा। इस्पात बाजार में वैश्विक उतार-चढ़ाव और कच्चे माल की कीमतों जैसी चुनौतियों के बीच कंपनी का यह प्रदर्शन महत्वपूर्ण है। मुनाफे में तेज उछाल और वंदे भारत के पहियों की आपूर्ति में स्थिरता से सेल की औद्योगिक क्षमता तथा रेलवे क्षेत्र में उसकी भूमिका को नई मजबूती मिली है।