रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने से ट्रंप ने रोके कदम, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा फिलहाल टला

Posted on: 2026-10-17


नई दिल्ली 17 अक्टूबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था, जिसमें भारत भी शामिल था। अमेरिका में तेल की कीमतों और आगामी मिडटर्म चुनावों को इस फैसले की अहम वजह माना जा रहा है। हालांकि, ट्रम्प के कदम की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की है। रूस पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से पीछे हटे ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की योजना को फिलहाल रोक दिया है। शुक्रवार को उन्होंने इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। संभावित रूप से इसकी चपेट में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश आ सकते थे।

इस कानून का उद्देश्य रूस की कमाई के स्रोतों को सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए उसे आर्थिक संसाधन जुटाने में मुश्किल हो। लेकिन ट्रम्प ने फिलहाल इस दिशा में सख्त कदम उठाने से परहेज किया है।

खास बात यह है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने का समझौता किया था। रूस के साथ इस डील और प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विरोध भी सामने आया है। 30 दिन के भीतर लेना था प्रतिबंधों पर फैसला रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े इस विधेयक को लिंडसे ग्राहम एक्ट कहा गया है। ट्रम्प ने 18 सितंबर 2026 को इस बिल पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इसे 262 के मुकाबले 159 वोटों से मंजूरी दी थी।

कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद ट्रम्प को 30 दिनों के भीतर प्रतिबंध लगाने के संबंध में फैसला करना था। हालांकि, उन्होंने तय समय पूरा होने से पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ से जुड़ी कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया। इस कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला था। इसके बावजूद ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि राष्ट्रपति इस कानून के बावजूद रूस के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बच सकते हैं।

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। उस महीने भारत ने रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना भारत के लिए चिंता का विषय थी।

यदि ऐसा कदम उठाया जाता, तो भारत के ऊर्जा आयात और उससे जुड़ी लागत पर असर पड़ने का खतरा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से रूस से तेल की आपूर्ति घटने पर वैश्विक कीमतें बढ़ सकती हैं।

ऐसे में रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाना अमेरिका के लिए भी मुश्किल हो सकता है। तेल की कीमतें और चुनाव भी हैं अहम वजह ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए हमलों के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही गई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी पड़ रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें नीचे आएं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके।

नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में महंगाई और पेट्रोल की कीमतें मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हो सकते हैं। रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने पर संसद में उसका बहुमत भी खतरे में पड़ सकता है। पिछले सप्ताह डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ समझौते का ऐलान किया था। इसके तहत अमेरिका रूस से डीजल खरीदेगा। साथ ही, रूसी डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में अप्रैल 2027 तक छूट दी गई है। इस कदम से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज बताए गए हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी सप्ताह अमेरिकी संसद के दोनों प्रमुख दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की।

रूस को राहत देने पर अमेरिकी सांसदों ने उठाए सवाल रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले कानून को दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों का समर्थन मिला था। ऐसे में ट्रम्प का इसे फिलहाल रोकने का फैसला विवाद का विषय बन गया है। सांसदों की आलोचना के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिशों और अमेरिका की अपनी ऊर्जा जरूरतों के बीच सरकार किस तरह संतुलन बनाएगी। फिलहाल ट्रम्प के फैसले से भारत सहित रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित 100% तक टैरिफ का खतरा टल गया है। हालांकि, रूस के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और प्रतिबंधों से जुड़ी नीति में क्या बदलाव होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।