पीटीआई का इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च आज, सरकार नहीं मना पाई विपक्ष को, बातचीत बेनतीजा

Posted on: 2026-10-04


 इस्लामाबाद, 04 अक्टूबर। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के आज (4 अक्टूबर) इस्लामाबाद की ओर होने वाले 'लॉन्ग मार्च' को रोकने के मकसद से सरकार और विपक्ष के बीच हुई बातचीत शनिवार को बेनतीजा रही। दोनों पक्ष अहम मुद्दों पर किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके। बातचीत दोबारा कब शुरू होगी, इस पर भी कोई समझौता नहीं हो पाया। पीटीआई नेता सलमान अकरम राजा ने कहा कि दोनों पक्ष चबुनियादी मुद्दों पर सहमत नहीं हो सके। सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि जेल में बंद पीटीआई संस्थापक इमरान खान से मुलाकात और उनके निजी डॉक्टर तक पहुंच को लेकर मतभेद बने हुए हैं। इस बीच पीटीआई ने कहा कि लॉन्ग मार्च तय समय पर होगा।

द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार सलमान ने कहा, "हमारा रुख यह था कि हम उस बिंदु की ओर आगे बढ़ सकते हैं जिस पर दोनों पक्ष सहमत हो सकें।"

अब्बास ने कहा कि विपक्ष ने उन इलाकों में सैन्य अभियानों के बारे में भी स्पष्टता मांगी थी जहां विस्थापित लोग रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकेत दिया है कि वह अभी इमरान खान के साथ मुलाकात की व्यवस्था करने की स्थिति में नहीं है, हालांकि उनकी बहनों और वकीलों के साथ मुलाकात की अनुमति दी जाएगी।

बातचीत बेनतीजा होने के बाद पीटीआई चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली खान ने कहा, "हम चाहते थे कि बातचीत सफल हो।" उन्होंने कहा कि पार्टी का लॉन्ग मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार होगा, लेकिन साथ ही कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई भी ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिससे प्रांत के लोगों के बीच तनाव पैदा हो। गोहर ने कहा कि राजनीति में किसी भी चीज को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए और जोर दिया कि लॉन्ग मार्च का सामना आपातकाल या गवर्नर शासन से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष बातचीत के अगले चरण पर सहमत नहीं हो सके। यह गतिरोध समझौते के मसौदे में कई बदलावों के बाद आया है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता शेरी रहमान ने कहा कि मसौदे में चार बार संशोधन किया गया और सरकार ने पीटीआई की चिंता को सुना, लेकिन जोर दिया कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता। शेरी ने कहा, "उन्होंने लॉन्ग मार्च और अन्य बातों पर समझौते से इनकार कर दिया है।" सरकार का रुख आतंकवाद-रोधी उपायों और खैबर पख्तूनख्वा सरकार की भूमिका पर केंद्रित था।

प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रांतीय सरकार को आतंकवाद के संबंध में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए और आरोप लगाया कि वह आतंकवाद-रोधी प्रयासों में अपनी भूमिका के बारे में भरोसा दिलाने में विफल रही है। राणा ने चेतावनी दी कि लॉन्ग मार्च को इस्लामाबाद की सीमा में घुसने नहीं दिया जाएगा और कहा कि किसी भी तरह की अशांति से कानून के जरिए निपटा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के अगले दौर के लिए कोई समय तय नहीं किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, बातचीत करने वाली टीमों के साथ विचार-विमर्श के बाद गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने टेलीफोन पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ को जानकारी दी और ऐवान-ए-सद्र में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की। विपक्ष और सरकार के बीच हुई बैठक की अध्यक्षता नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक ने की। यह बातचीत तब शुरू हुई जब सरकार और पीटीआई प्रस्तावित मार्च और व्यापक राजनीतिक मतभेदों को लेकर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे। सरकारी प्रतिनिधिमंडल में गृहमंत्री मोहसिन नकवी, कश्मीर मामलों के मंत्री अमीर मुकाम, गृह राज्यमंत्री तलाल चौधरी, प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह और पीपीपी नेता नवीद क़मर, शेरी रहमान व एजाज जखरानी शामिल थे। विपक्ष की ओर से नासिर अब्बास, गौहर अली खान, असद कैसर, सलमान अकरम राजा, आमिर डोगर और हलीम आदिल शामिल रहे।