भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह
वैश्विक घटनाक्रमों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। कच्चे तेल की
कीमतों में तेजी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में
बढ़ोतरी, अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़े और विदेशी निवेशकों
की गतिविधियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके
चलते बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है। शुक्रवार को घरेलू
शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ, हालांकि कारोबारी सत्र के
दौरान हासिल की गई अधिकांश बढ़त बाजार के बंद होने तक कायम नहीं रह सकी। सेंसेक्स 362.57
अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 76,515.43
पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन सत्र के दौरान हुई हलचल के कारण
प्रमुख सूचकांक दिन के उच्च स्तर से नीचे फिसल गए।
अमेरिका से आए हालिया रोजगार आंकड़ों ने भी बाजार की चिंताओं को
बढ़ा दिया है। अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.62 लाख
नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से लगभग तीन गुना
अधिक हैं। श्रम भागीदारी दर बढ़कर 61.6 प्रतिशत हो गई,
जबकि बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रही।
मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना फिर से बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व
सितंबर में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है या बढ़ोतरी पर विचार कर
सकता है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और विदेशी संस्थागत निवेशकों
की रणनीति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में
भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से तेल कीमतों, अमेरिकी
ब्याज दरों की उम्मीदों, वैश्विक बॉन्ड बाजार और विदेशी
निवेश प्रवाह से तय होगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल कीमतों में
नरमी आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि तेल और
बॉन्ड यील्ड दोनों ऊंचे बने रहते हैं तो निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है। कुल
मिलाकर, घरेलू आर्थिक बुनियाद मजबूत होने के बावजूद वैश्विक
परिस्थितियां अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख दिशा-निर्धारक बनी
रहेंगी।