श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भक्त अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि भगवान कृष्ण को प्रेम और भक्ति से चढ़ाया गया साधारण सा प्रसाद भी बेहद प्रिय होता है। यही कारण है कि जन्माष्टमी पर 56 भोग की परंपरा के साथ-साथ कुछ खास सात भोगों का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन भोगों को श्रद्धा से अर्पित करने से कान्हा जी की कृपा प्राप्त होती है।
भगवान श्रीकृष्ण को बचपन से ही माखन, मिश्री और दूध से बनी चीजें बेहद पसंद थीं। यही वजह है कि जन्माष्टमी और अन्य कृष्ण पूजा में दूध, दही, माखन और मिठाइयों का विशेष स्थान होता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कान्हा को अलग-अलग प्रकार के भोग लगाते हैं और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। माखन मिश्री का भोग भगवान श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भोग माखन मिश्री माना जाता है। धार्मिक कथाओं में भी वर्णन मिलता है कि बाल गोपाल को माखन बहुत पसंद था। इसी कारण उन्हें माखन चोर भी कहा जाता है।
जन्माष्टमी के दिन माखन और मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में खुशहाली आती है और भगवान कृष्ण अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखते हैं। कई लोग पूजा के बाद इस प्रसाद को परिवार और बच्चों में बांटते हैं। पंचामृत का भोग पंचामृत भगवान कृष्ण की पूजा में विशेष महत्व रखता है। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को भगवान को अर्पित किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से पंचामृत को पवित्र माना जाता है। जन्माष्टमी की पूजा में भगवान कृष्ण का अभिषेक करने के बाद पंचामृत का प्रसाद भक्तों में वितरित किया जाता है।
दूध से बनी मिठाइयां भगवान कृष्ण को दूध और उससे बनी चीजें प्रिय मानी जाती हैं। इसलिए जन्माष्टमी पर दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। पेड़ा, खीर, रबड़ी और दूध से बनी अन्य मिठाइयां कान्हा को अर्पित की जाती हैं। इनका भोग लगाने से भक्त भगवान कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। धनिया पंजीरी का भोग जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का विशेष महत्व होता है। कई स्थानों पर भगवान कृष्ण को धनिया पंजीरी का भोग लगाने की परंपरा है।
धनिया पंजीरी को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसमें धनिया पाउडर के साथ घी, मेवा और मिश्री का उपयोग किया जाता है। इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। फल और मिष्ठान का भोग भगवान को मौसमी फल और मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार केले, सेब, अंगूर और अन्य फलों का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि भगवान को भोग में वस्तु की कीमत नहीं बल्कि भक्त की भावना प्रिय होती है। इसलिए साधारण फल भी प्रेम और श्रद्धा से चढ़ाए जाएं तो उनका महत्व बढ़ जाता है। खीर का भोग खीर भगवान कृष्ण को प्रिय भोगों में से एक मानी जाती है। दूध, चावल, चीनी और मेवों से तैयार खीर जन्माष्टमी की पूजा में खास तौर पर बनाई जाती है। कई घरों में जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म के बाद खीर का भोग लगाया जाता है। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में सभी को बांटा जाता है। तुलसी दल के साथ भोग भगवान कृष्ण की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बिना तुलसी दल के भगवान विष्णु और कृष्ण को लगाया गया भोग अधूरा माना जाता है। इसलिए भक्त जब भी कान्हा जी को भोग अर्पित करते हैं तो उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय है। 56 भोग की परंपरा क्यों है खास भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा भी काफी प्रसिद्ध है। इसके पीछे धार्मिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था, तब उन्होंने सात दिनों तक बिना भोजन किए लोगों की रक्षा की थी। कहा जाता है कि आठवें दिन भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए गए। हालांकि हर भक्त के लिए इतने व्यंजन बनाना संभव नहीं होता, इसलिए श्रद्धा से कुछ प्रिय भोग अर्पित करना भी उतना ही शुभ माना जाता है। भक्ति में भावना का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण को दिखावे से ज्यादा भक्त की भावना प्रिय होती है। एक छोटे से भोग को भी अगर सच्चे मन से अर्पित किया जाए तो उसका महत्व बढ़ जाता है। जन्माष्टमी का पर्व केवल पूजा और भोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और भगवान कृष्ण के आदर्शों को याद करने का अवसर भी है। भक्त अपने घरों में कान्हा की झांकी सजाते हैं, भजन गाते हैं और आधी रात को भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इसलिए अगर कोई भक्त 56 व्यंजन तैयार नहीं कर सकता तो निराश होने की जरूरत नहीं है। माखन मिश्री, पंचामृत, खीर, पंजीरी जैसे प्रिय भोग श्रद्धा के साथ अर्पित करके भी भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त की जा सकती है।