मुंबई: बुधवार को साधना की 85वीं जयंती पर सायरा बानो ने उन्हें याद किया और उन्हें "भारतीय सिनेमा की बेहतरीन कलाकारों में से एक" बताया। सायरा ने इंस्टाग्राम पर साधना और राज कपूर व माला सिन्हा जैसे अन्य सितारों के साथ अपनी पुरानी तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, "साधना को उनके जन्मदिन पर प्यार भरी यादें। भारतीय सिनेमा की बेहतरीन कलाकारों में से एक, और एक ऐसी शख्सियत जिनमें गजब की आत्मीयता और शालीनता थी।"
इसके बाद सायरा ने उनकी फिल्मों "वो कौन थी", "मेरा साया" और "वक्त" के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, "वे निस्संदेह एस. मुखर्जी के फिल्मलय स्टूडियो की बेहतरीन खोजों में से एक थीं, एक ऐसी कलाकार जिनका "वो कौन थी", "मेरा साया" और "वक्त" में किया गया शानदार काम आज भी लोगों के दिलों और यादों में हमेशा के लिए बसा हुआ है।" साधना ने सबसे पहले 1955 में रिलीज़ हुई फिल्म 'श्री 420' में बिना क्रेडिट वाली भूमिका निभाई थी। इसके बाद वे डायरेक्टर शशाधर मुखर्जी की फिल्म 'लव इन शिमला' में नज़र आईं, जिसमें उनका हेयरस्टाइल बहुत मशहूर हुआ और "साधना कट" के नाम से जाना जाने लगा।
साधना ने 'परख', 'हम दोनों', 'असली-नकली', 'एक मुसाफिर एक हसीना', 'मेरे महबूब', 'वो कौन थी?', 'आरज़ू', 'वक्त' और 'मेरा साया' जैसी फिल्मों में काम किया। 1974 में, उन्होंने क्राइम थ्रिलर 'गीता मेरा नाम' से डायरेक्टर के तौर पर शुरुआत की और बाद में एक्टिंग छोड़ दी। स्क्रीन पर उनकी आखिरी फिल्म 'उल्फत की नई मंज़िलें' थी, जो 1994 में रिलीज़ हुई थी। साधना का 2015 में 74 साल की उम्र में निधन हो गया। वहीं, सायरा भी हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं। उन्होंने 1961 में 'जंगली' फिल्म से एक्टिंग की शुरुआत की थी। 'शागिर्द', 'दीवाना', 'सगीना', 'आई मिलन की बेला', 'पड़ोसन', 'हेरा-फेरी' और 'गोपी' जैसी फिल्मों में अपने काम से उन्हें बहुत शोहरत मिली। रिटायरमेंट से पहले उनकी आखिरी फ़िल्म 1988 में आई 'फ़ैसला' थी। दिग्गज स्टार दिलीप कुमार की पत्नी बानू ने भोजपुरी फ़िल्म 'अब तो बन जा सजनवा हमार' के लिए प्रोड्यूसर के तौर पर भी काम किया। उन्हें हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है और 2022 में उन्हें "75 बेस्ट बॉलीवुड एक्ट्रेस" की लिस्ट में शामिल किया गया था।