नेपाल में सरकार गठन के पांच महीने बाद भी 31 में से 21 राजदूतावास राजदूतविहीन

Posted on: 2026-08-23


काठमांडू, 23 अगस्त  नेपाल में नई सरकार के गठन को करीब पांच महीने पूरे होने वाले हैं, लेकिन विदेशों में रिक्त नेपाली राजनयिक मिशनों में राजदूतों की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। सरकार ने 13 देशों में प्रतिस्पर्धा के आधार पर राजदूत नियुक्त करने के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन प्रक्रिया अभी निर्णय तक नहीं पहुंच पाई है। इसके अलावा सात अन्य देशों में भी नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

नेपाल के 31 राजदूतावासों में से 21 इस समय राजदूतविहीन हैं। लंबे समय से पद रिक्त होने के कारण कई मिशन कार्यवाहक प्रमुखों के भरोसे चल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजदूतों की अनुपस्थिति से नेपाल की विदेश नीति और विभिन्न देशों में उसका कूटनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो रहा है।

नेपाल के विदेशों में 31 राजदूतावास हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के लिए स्थायी मिशन भी शामिल हैं। इसके अलावा आठ महावाणिज्य दूतावास हैं। पिछले वित्त वर्ष तक 34 राजदूतावास और 10 महावाणिज्य दूतावास थे, लेकिन तीन राजदूतावास और दो महावाणिज्य दूतावास बंद करने की प्रक्रिया में हैं।

दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क और ब्राजील स्थित नेपाली राजदूतावासों तथा चीन के छेंगदू और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित महावाणिज्य दूतावासों को अलग रखने के बाद शेष मिशनों में 21 राजदूतावास ऐसे हैं, जहां राजदूत का पद खाली है। इनमें 11 राजदूतावास पिछले वर्ष नवंबर के अंत से और छह इस वर्ष अप्रैल से राजदूतविहीन हैं। वहीं, कार्यकाल पूरा कर नेपाल लौटे छह करियर राजदूत (विदेश मंत्रालय के सहसचिव) भी सरकार के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

भारत और चीन सहित अमेरिका, ब्रिटेन, बहरीन, बांग्लादेश, बेल्जियम, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, इजरायल, जापान, दक्षिण कोरिया, कुवैत, मलेशिया, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, पुर्तगाल, कतर, रूस, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, यूएई और स्पेन में स्थित नेपाली राजदूतावासों में राजदूतों के पद रिक्त हैं।

नेपाल के संयुक्त राष्ट्र स्थायी मिशन अमेरिका के न्यूयॉर्क, स्विट्जरलैंड के जेनेवा और ऑस्ट्रिया के वियना में हैं। वहीं, भारत के कोलकाता, चीन के ल्हासा, हांगकांग और ग्वांगझोउ, अमेरिका के न्यूयॉर्क और डलास, यूएई के दुबई तथा सऊदी अरब के जेद्दा में नेपाली महावाणिज्य दूतावास हैं।

उल्लेखनीय है कि जेन-जी आंदोलन के बाद बनी चुनावी सरकार ने पिछले वर्ष नवंबर में 11 देशों में कार्यरत नेपाली राजदूतों को वापस बुलाने का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में 27 मार्च को सरकार बनने के बाद छह अन्य स्थानों से भी राजदूत वापस बुलाए गए। इन राजदूतों की नियुक्ति नेपाली कांग्रेस, एमाले और नेकपा के बीच सत्ता-साझेदारी के तहत हुई थी।

इनमें से दो राजदूतावास बंद करने की प्रक्रिया में हैं। शेष 15 देशों के लिए अभी तक राजदूत नियुक्ति की सिफारिश भी नहीं की जा सकी है। इससे नेपाल की विदेश नीति और कूटनीतिक मिशनों में नेतृत्व का संकट और लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है।