बुधवार को कोयला मंत्रालय से संबद्ध संसद सदस्यों की सलाहकार समिति ने वाणिज्यिक कोयला खनन सुधारों की प्रगति की समीक्षा की और इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य विषय 'वाणिज्यिक कोयला खनन सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना' था। इस बैठक में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और कोयला सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के अधिकारी तथा समिति के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक को संबोधित करते हुए रेड्डी ने कहा कि वाणिज्यिक कोयला खनन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में शुरू किए गए प्रमुख सुधारों में से एक है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से कोयला क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और कुशल बनाया है, जिससे प्रतिस्पर्धा और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिला है।
मंत्री जी ने समिति को सूचित किया कि अब तक वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 14 चरण पूरे हो चुके हैं, जबकि 15वां चरण वर्तमान में चल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय उद्योग निकायों और निजी कंपनियों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क साध रहा है और रोड शो तथा हितधारकों के साथ परामर्श करके वाणिज्यिक कोयला खनन के बारे में जागरूकता बढ़ाने और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है।
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में भारत को एक अरब टन कोयले का उत्पादन हासिल करने में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में इन खदानों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत था।
चल रहे सुधारों के प्रभाव को रेखांकित करते हुए, दत्त ने कहा कि पूरी तरह से खोजे गए कोयला ब्लॉकों को परिचालन में लाने के लिए आवश्यक समय 51 महीने से घटकर 40 महीने हो गया है, जबकि आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉकों के लिए समय सीमा 66 महीने से घटकर 52 महीने हो गई है।
कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, रुपिंदर बराड़ ने वाणिज्यिक कोयला खनन सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करने के उपायों पर एक प्रस्तुति दी।