लिपुलेख के जरिए भारत-चीन व्यापार शुरू होने पर नेपाल ने जताई आपत्ति

Posted on: 2026-08-04


काठमांडू, 04 अगस्त । भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के रास्ते पारंपरिक सीमा व्यापार औपचारिक रूप से फिर से शुरू होने को लेकर नेपाल सरकार ने अपनी चिंता जताई है।

नेपाल लगातार लिपुलेख क्षेत्र पर अपने संप्रभु भूभाग होने का दावा करता रहा है। नेपाल सरकार ने भारत और चीन द्वारा नेपाल की सहमति या भागीदारी के बिना ही लिपुलेख के माध्यम से व्यापार फिर से शुरू करने के फैसले पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है।

नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में नेपाल को शामिल किए बिना लिया गया कोई भी निर्णय या गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी।

नेपाल दोहराता रहा है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र नेपाल के अभिन्न अंग हैं। दूसरी ओर, भारत का रुख है कि लिपुलेख उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अंतर्गत उसका अपना क्षेत्र है, और चीन ने भी भारत के साथ इसी मार्ग से व्यापार फिर से शुरू किया है।

नेपाली विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "यह एक गंभीर मामला है। सरकार अपने माध्यम से संबंधित मंचों पर इस मुद्दे को उठाएगी।"

इस मुद्दे पर पहले भी नेपाल ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद, जब 2020 में भारत ने लिपुलेख को जोड़ने वाली सड़क का उद्घाटन किया, तो नेपाल-भारत संबंधों में तनाव आ गया था। उसी वर्ष, नेपाल ने एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी किया जिसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को शामिल किया गया था।

बताया जाता है कि लिपुलेख के रास्ते भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार 1992 से चल रहा है। भारतीय मीडिया ने लिखा है कि कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में बंद हुआ यह व्यापार अब फिर से चालू हो गया है। दोनों देशों ने लिपुलेख से व्यापार को एक जून से प्रारंभ करने की सहमति जताई थी लेकिन जरूरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक तैयारियों की कमी की वजह से तब शुरू हो नहीं पाया था।