आईआईटी-निफ्ट की साझेदारी से मजबूत होगा हथकरघा क्षेत्र, बुनकरों को मिलेगा तकनीकी सहयोग : डॉ. एम. बीना

Posted on: 2026-08-02


वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने कहा है कि आईआईटी और निफ्ट जैसे प्रमुख संस्थानों की साझेदारी से ऐसे तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो बुनकरों की मेहनत कम करने, पारंपरिक बुनाई प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक सटीकता लाने और उनकी आजीविका बेहतर बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने यह बात रविवार को आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) में आयोजित ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2.0’ को संबोधित करते हुए कही।

विरासत और तकनीक के बीच बनेगा सेतु

डॉ. एम. बीना ने भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच पूरक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हथकरघा हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि तकनीक भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हैकाथॉन के जरिए दोनों क्षेत्रों को जोड़कर बुनकर समुदाय के उत्थान का प्रयास किया जा रहा है।

2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 में 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। देशभर से चुनी गई शीर्ष 100 टीमों के 280 प्रतिभागियों ने हथकरघा क्षेत्र के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया।

करघा संचालन से विपणन तक नवाचार की जरूरत

डॉ. बीना ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र स्वाभाविक रूप से टिकाऊ विकास और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। उन्होंने करघा संचालन को अधिक सुविधाजनक बनाने, डिजाइन विकास में नए प्रयोग करने और आधुनिक विपणन प्रणालियों को अपनाने के लिए नवाचार पर जोर दिया।

हथकरघा तकनीक के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि आईआईटी दिल्ली में स्थापित होने वाला ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हथकरघा टेक्नोलॉजी’ हथकरघा और तकनीक के एकीकरण को और मजबूत करेगा। इससे हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता बरकरार रखते हुए मानकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अगले सप्ताह प्रस्तावित है केंद्र का उद्घाटन

यह सेंटर वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से अगले सप्ताह उद्घाटित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके जरिए हथकरघा क्षेत्र में तकनीकी अनुसंधान, नवाचार और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

नवाचार और सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा

हैकाथॉन ने भारत के हथकरघा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए नवाचार, सहयोगात्मक अनुसंधान और तकनीक आधारित हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने की वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया। पहल के जरिए तकनीकी संस्थानों, युवा नवप्रवर्तकों और हथकरघा क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

उत्पादकता और बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का लक्ष्य

युवा नवप्रवर्तकों को हथकरघा क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उत्पादकता, स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के साथ देश की समृद्ध हथकरघा विरासत को संरक्षित करना है।