पुरानी दिल्ली को संरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करेगा आईवीपीएन

Posted on: 2026-07-09


नई दिल्ली, 09 जुलाई । दिल्ली सरकार ने पुरानी दिल्ली के संरक्षण व पुनर्विकास के उद्देश्य से गठित शाहजहानाबाद रिडेवलपमेंट कॉरपोरेशन का नाम बदलकर अब इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (आईवीपीएन) कर दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि निगम के माध्यम से पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बनाने की व्यापक और पहल प्रारंभ हो चुकी है।

इसी क्रम में इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम की चेयरपर्सन व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में निगम की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) आयोजित की गई। बैठक में शहरी विकास मंत्री एवं निगम के उपाध्यक्ष आशीष सूद, प्रबंध निदेशक संदीप कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक में पुरानी दिल्ली के समग्र पुनर्विकास, विरासत संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन को बढ़ावा देने से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में ऐतिहासिक चांदनी चौक के पुनर्विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाजार का डिजाइन इस प्रकार विकसित किया जाए जिससे उसकी ऐतिहासिक पहचान, पारंपरिक स्वरूप और सांस्कृतिक गरिमा स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लाखों लोगों की आवाजाही को देखते हुए क्षेत्र में आधुनिक एवं उपयोगी सार्वजनिक शौचालय (टॉयलेट ब्लॉक) विकसित किए जाएं और नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक टाउन हॉल के पुनर्विकास की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि इसका एक प्रमुख प्रवेश एवं निकास चांदनी चौक की ओर से भी विकसित किया जाए ताकि यह ऐतिहासिक इमारत एक प्रमुख विरासत एवं पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सके। बैठक में स्थानीय व्यापारियों व दुकानदारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखने पर बल दिया गया ताकि विरासत संरक्षण और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

मुख्यमंत्री का कहना था कि जब से चांदनी चौक का विकास हुआ है, तभी से यहां बाजार विकसित हुआ था, इसलिए इस बाजार का गौरव वापस लौटाने में यहां के बाजार, व्यापारियों व दुकानदारों का भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने कहा कि चादंनी चौक का विकास यहां के बाजारों, पर्यटकों, खरीदारों और स्थानीय निवासियों के हितों के ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बाजार में एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित करने का भी निर्देश दिया ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आवश्यक जानकारी, मार्गदर्शन और त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। क्षेत्र में व्यवस्थित पार्किंग सुविधाओं के विकास पर भी विशेष जोर दिया गया, जिससे आगंतुकों को आवागमन और वाहन पार्किंग में सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यापक परियोजना में यमुना बाजार स्थित हनुमान मंदिर एवं उसके पीछे के क्षेत्र के समग्र विकास का भी विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जाए। इसके अतिरिक्त जामा मस्जिद क्षेत्र और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग के समग्र सौंदर्यीकरण एवं पुनर्विकास की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पुरानी दिल्ली का विकास केवल भौतिक आधारभूत संरचना तक सीमित न रहे, बल्कि विरासत का संरक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों, नागरिक सुविधाओं व पर्यावरणीय संतुलन को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए। इसी उद्देश्य से इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम अब विरासत संरक्षण और आधुनिक शहरी विकास को साथ लेकर आगे बढ़ेगा। इसके तहत ऐतिहासिक भवनों के संरक्षण, आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार व अन्य पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।

बैठक में शहरी विकास मंत्री एवं निगम के उपाध्यक्ष आशीष सूद ने कहा कि चांदनी चौक तथा आसपास के ऐतिहासिक क्षेत्रों के पुनर्विकास का कार्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को भी पूरी संवेदनशीलता के साथ संरक्षित किया जाएगा। इस उद्देश्य से निर्णय लिया गया कि पुनर्विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में इतिहासकारों, विरासत संरक्षण विशेषज्ञों, स्थापत्य विशेषज्ञों तथा संबंधित क्षेत्र के जानकारों का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे बाजार का मूल ऐतिहासिक स्वरूप, पारंपरिक वास्तुकला, सांस्कृतिक पहचान और विरासत की विशिष्टता सुरक्षित रखते हुए आधुनिक नागरिक सुविधाओं का भी समुचित विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पुरानी दिल्ली लगभग 7.12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। 350 वर्ष से अधिक पुराने इस ऐतिहासिक शहर में एक विश्व धरोहर स्थल, 10 राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक, 10 राज्य संरक्षित स्मारक और 700 से अधिक स्थानीय स्तर पर संरक्षित विरासत स्थल मौजूद हैं। हर दिन यहां लाखों लोग खरीदारी, व्यापार, दर्शन और पर्यटन के लिए आते हैं। ऐसे में इस ऐतिहासिक क्षेत्र का सुनियोजित विकास न केवल इसकी विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि व्यापार और पर्यटन को नई गति देने के लिए जरूरी है।