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कोलकाता, 02 जुलाई। तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर चल रही सियासी लड़ाई गुरुवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के 10 विधायक आज नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। इस सुनवाई में बागी गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी निधि पर अपना दावा पेश करेगा।
ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि बागी गुट ने पहले ही आयोग से सुनवाई का समय मांगा था, जिसके बाद आयोग ने दो जुलाई को पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए बुलाया है। बुधवार शाम बागी गुट के विधायक नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।
यह विवाद 22 जून को उस समय और गहरा गया था, जब बागी गुट ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और 10 सदस्यीय उपसमिति का गठन किया। नई कार्यकारिणी में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप राय को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बाद दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक और कानूनी संघर्ष तेज हो गया।
बागी गुट के अधिवक्ताओं ने निर्वाचन आयोग के समक्ष सभी प्रस्ताव और आवश्यक कानूनी दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए हैं। अब आयोग दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों के आधार पर मामले पर विचार करेगा। बागी गुट का दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायक उसके साथ हैं, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के पास केवल 20 विधायक हैं। इसी आधार पर बागी गुट का कहना है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उसका दावा अधिक मजबूत है।
बागी गुट ने निर्वाचन आयोग के समक्ष यह भी तर्क रखा है कि यदि उसके साथ मौजूद 60 से अधिक विधायकों के औसत मतों की गणना की जाए तो उसके पक्ष में लगभग 48 लाख मत आते हैं, जो निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानदंड से अधिक हैं। दूसरी ओर, ममता गुट के साथ केवल 20 विधायक होने के कारण उसके मत निर्धारित सीमा तक नहीं पहुंचते।
अब सभी की नजर निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ की सुनवाई पर टिकी है। इस सुनवाई का परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है कि तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार पर किस गुट का दावा मजबूत माना जाएगा। हालांकि, अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग द्वारा दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध कानूनी तथ्यों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।