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नई दिल्ली, 30 जून । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा के बकाया भुगतान, नई विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी योजना (वीबी-जी राम जी) और ग्रामीण रोजगार के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को कमजोर कर दिया है, राज्यों का बकाया नहीं चुकाया है और नई योजना के जरिए राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है।
खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि लोकसभा में दिए गए एक उत्तर के अनुसार इस साल मार्च तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का 17,144.13 करोड़ रुपये बकाया था। इसमें 7,846.25 करोड़ रुपये मजदूरी देनदारी (वेज लायबिलिटी) शामिल है। मजदूरों को उनके हक का भुगतान अब तक क्यों नहीं मिला।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक जुलाई से लागू की जा रही वीबी-जी राम जी योजना के बावजूद कई राज्यों को मनरेगा का बकाया भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक के लगभग 700 करोड़ रुपये, झारखंड के करीब 900 करोड़ रुपये सहित तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों के भी भुगतान लंबित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि नई योजना में कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को उठाना होगा। खरगे ने कहा कि विभिन्न राज्यों ने इस वित्तीय व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है और केंद्र को राज्यों की चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए।
खरगे ने नई योजना में 60 दिन तक कार्य बंद रखने के प्रावधान पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि कई राज्यों ने इसका विरोध किया है, क्योंकि इससे किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 125 दिन रोजगार उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मजदूरी दर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कम से कम पांच राज्यों ने मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से मनरेगा के तहत 400 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मजदूरों को सम्मानजनक पारिश्रमिक देने के प्रति गंभीर नहीं है।
खरगे ने मानसून और कृषि स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि जून में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है और खरीफ बुआई भी प्रभावित हुई है। उनके अनुसार ऐसे समय में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को कमजोर करना मजदूरों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और गरीब तबकों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इन सभी मुद्दों पर जवाब देने की मांग की।