24 लाख की लागत से बना स्कूल भवन, दो साल में ही जर्जर दीवारों में गहरी दरारें

Posted on: 2026-06-24


धमतरी, 24 जून । धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम बोड़रा में लगभग 24 लाख रुपये की लागत से निर्मित शासकीय माध्यमिक शाला भवन निर्माण के महज दो वर्ष के भीतर ही गंभीर क्षति का शिकार हो गया है। तीन कमरों वाले इस भवन की दीवारों में खतरनाक दरारें पड़ गई हैं और भवन का एक हिस्सा धीरे-धीरे जमीन में धंसता जा रहा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि दरारें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे भवन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके बावजूद कक्षाओं के संचालन की मजबूरी के चलते छात्र-छात्राएं इसी भवन में अध्ययन करने को विवश हैं।

स्थिति का निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने भवन के दो क्षतिग्रस्त कमरों में बच्चों को बैठाने से मना किया है, लेकिन स्कूल प्रशासन के सामने बड़ी समस्या यह है कि कुल तीन कमरों वाले भवन में यदि दो कमरों का उपयोग बंद कर दिया जाए तो छठवीं से आठवीं तक के 53 विद्यार्थियों को एक ही कमरे में कैसे बैठाया जाए। इसी कारण मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई उन कमरों में भी जारी है जिनकी दीवारें धंसने और टूटने की स्थिति में हैं।

प्रधान पाठक महेंद्र बोरझा ने बताया कि भवन की खराब स्थिति की जानकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई थी। इसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जनपद सीईओ तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की और दो कमरों को असुरक्षित मानते हुए उनमें बच्चों को न बैठाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय में केवल तीन कमरे हैं और उनमें से दो गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, ऐसे में 53 छात्र-छात्राओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना संभव नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन ने लाखों रुपये खर्च कर नया भवन बनवाया था, लेकिन निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी और संभावित अनियमितताओं के कारण भवन तीन वर्ष पूरे होने से पहले ही जर्जर होने लगा है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

इस संबंध में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अनुविभागीय अधिकारी चेतन लाल हिरवानी ने बताया कि ठेकेदार के साथ हुए अनुबंध की अवधि में अभी दो वर्ष शेष हैं, इसलिए भवन की मरम्मत उसी से कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त कमरों में बच्चों को बैठाने से मना किया गया है तथा बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद आवश्यक मरम्मत कार्य कराया जाएगा।