ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने की मांग, 58 तृणमूल विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को भेजा पत्र

Posted on: 2026-06-03


कोलकाता, 02 जून । तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के बागी विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बसु को पत्र भेजकर ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त करने की मांग की है। पत्र पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है।

पत्र में केवल विपक्ष के नेता के पद के लिए ही नहीं, बल्कि विधानसभा में तृणमूल विधायक दल के उपनेताओं और मुख्य सचेतक के नामों का भी प्रस्ताव दिया गया है। उपनेता के रूप में संदीपन साहा, जावेद खान और शिउली साहा के नाम सुझाए गए हैं, जबकि मुख्य सचेतक के लिए आखरुज्जमान का नाम प्रस्तावित किया गया है।

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने इस पत्र को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि अध्यक्ष पत्र को स्वीकार कर लेते हैं, तो उलूबेड़िया के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को औपचारिक रूप से विपक्ष के नेता का दर्जा मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि बागी विधायकों द्वारा भेजे गए पत्र में ममता बनर्जी को ही पार्टी की सभानेत्री बताया गया है।

दरअसल, कथित हस्ताक्षर जालसाजी विवाद सामने आने के बाद से तृणमूल कांग्रेस में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। विवाद की शुरुआत उस प्रस्ताव पत्र से हुई थी, जिसमें वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की सिफारिश की गई थी। आरोप लगाया गया कि तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए प्रस्ताव पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने ही सबसे पहले विधानसभा को कथित हस्ताक्षर जालसाजी की जानकारी दी थी। इसके बाद हेयर स्ट्रीट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने जांच शुरू की। मामले की जांच में सीआईडी भी पुलिस की सहायता कर रही है। जांच के दौरान अब तक 13 विधायकों से पूछताछ की जा चुकी है।

इस विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस में टूट की अटकलें भी तेज हो गई हैं। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद असंतुष्ट विधायकों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। कई विधायक खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान दे चुके हैं, जिससे संगठन के भीतर संकट और गहरा गया है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बागी विधायक स्वयं को “नई तृणमूल” के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि भविष्य में पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिह्न किस गुट के पास रहेगा।

इसी राजनीतिक खींचतान के बीच मंगलवार को लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को तत्काल विपक्ष के नेता का दर्जा देने की मांग की थी। हालांकि, उस समय अध्यक्ष रथींद्र बसु कोलकाता में मौजूद नहीं थे, इसलिए पत्र स्वीकार नहीं किया जा सका। बुधवार को अध्यक्ष विधानसभा पहुंचे, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।