हरिकांता ओवरसीज की स्टॉक मार्केट में निराशाजनक शुरुआत

Posted on: 2026-06-02


नई दिल्ली, 02 जून । सिंथेटिक टेक्सटाइल फैब्रिक का उत्पादन करने वाली कंपनी हरिकांता ओवरसीज के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में गिरावट के साथ एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को जबरदस्त झटका दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 91 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 12.36 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 79.75 रुपये के स्तर पर हुई। कमजोर लिस्टिंग के बाद बिकवाली शुरू हो जाने के कारण थोड़ी देर में ही कंपनी के शेयर गिर कर 75.77 रुपये के लोअर सर्किट लेवल तक आ गए। इस तर पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 15.23 रुपये यानी 16.74 प्रतिशत का नुकसान हो गया।

हरिकांता ओवरसीज का 24.30 करोड़ रुपये का आईपीओ 20 से 27 मई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.12 गुना सब्सक्राइब हो सका। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 21.33 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में सिर्फ 0.70 गुना सब्सक्रिप्शन आया। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन भी सिर्फ 66 प्रतिशत ही सब्सक्राइब हो सका। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 26.70 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नई मशीनरी की खरीदारी करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत में उतार चढ़ाव होता रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी को 4.47 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। इसी तरह, अगले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से लेकर 30 नवंबर तक कंपनी 5.09 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाने में सफल रही।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में उतार-चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में इसे 35.50 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं अगले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से लेकर 30 नवंबर तक कंपनी को 26.28 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज में कमी आई। वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में कंपनी पर 3.26 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से लेकर 30 नवंबर तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 2.87 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस दौरान कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2024-25 में ये 6.59 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो अगले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से लेकर 30 नवंबर तक बढ़ कर 11.68 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह, कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ 13.79 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो अगले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से लेकर 30 नवंबर तक बढ़ कर 18.77 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।