दिल्ली 29 मई: गर्मी के बढ़ते प्रभाव के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिजली की खपत में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। पिछले लगभग एक सप्ताह से शहर में अधिकतम बिजली मांग लगातार 8 हजार मेगावाट से ऊपर बनी हुई है, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। बिजली विभाग के अनुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में मांग और बढ़ सकती है और यह 9 हजार मेगावाट के स्तर को भी पार कर सकती है। इस संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी है।
इसी क्रम में दिल्ली सरकार ने सभी विभागों को बिजली के दुरुपयोग को रोकने और ऊर्जा-कुशल उपाय अपनाने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक और सरकारी दोनों स्तरों पर बिजली की बचत सुनिश्चित करना है, ताकि गर्मी के दौरान आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील के बाद सरकार ने ईंधन और ऊर्जा बचत को प्राथमिकता दी है। इसके तहत कई प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं, जिनका उद्देश्य ऊर्जा खपत को नियंत्रित करना है।
सरकारी निर्देशों में विभागीय ऊर्जा खर्च में कटौती, सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को बढ़ावा देना और अधिकारियों तथा कर्मचारियों को निजी या सरकारी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। विशेष रूप से मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के उपयोग पर जोर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी नए आदेशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी सरकारी कार्यालयों में बिजली की अनावश्यक खपत को रोका जाए और ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जाए। इसके साथ ही कार्यालय समय के बाहर अनावश्यक बिजली उपयोग पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो पावर मैनेजमेंट को और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। हालांकि, अभी तक आपूर्ति व्यवस्था सामान्य बनी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में चुनौती बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा संरक्षण के उपाय लंबे समय तक लागू किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की बिजली संकट की स्थिति से बचा जा सके। कुल मिलाकर, दिल्ली में बढ़ती बिजली मांग ने सरकार को सतर्क कर दिया है और प्रशासन अब ऊर्जा बचत को लेकर व्यापक स्तर पर कदम उठा रहा है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर रखा जा सके।