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नई दिल्ली, 20 मई । विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सड़कों पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे सार्वजनिक और कानून व्यवस्था से जुड़ा विषय बताया है। संगठन का कहना है कि यह इबादत नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन का तरीका है और राज्य सरकारों को इसपर रोक लगानी चाहिए।
विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने बुधवार को कहा कि सड़कों पर नमाज, नमाज नहीं फसाद है। यह केवल संविधान विरोधी ही नहीं है अपितु, मानवता और इस्लाम विरोधी भी है। इसके दुष्परिणामों को देखते हुए ही सात उच्च न्यायालयों ने सड़कों पर नमाज रोकने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी ऐसे संकेत दे चुकी है। इसका अर्थ है सड़क पर नमाज पढ़ने की जिद न्यायपालिका की अवमानना भी है।
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल 5 मिनट का मामला नहीं है। दिल्ली के सभी महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर घंटे ट्रेन बाधित हो जाती थी, जब पटरियों पर बैठकर नमाज पढ़ी जाती थी। गुरुग्राम से गुजरने वाले जयपुर हाईवे पर 8-8 घंटे ट्रैफिक जाम होता था। स्कूल बसें जाम में फंस जाती थी। मासूम बच्चे बिलखते रहते थे। एंबुलेंस के फंसने के कारण मरीजों की जान पर भी बन जाती थी लेकिन, किसी नमाज़ी का दिल नहीं पिघलता था।
डॉ जैन ने कहा कि कई हदीसों में भी सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए मना किया है। इसलिए कई मुस्लिम देशों में भी इस पर प्रतिबंध है। किसी भी सभ्य समाज में इसको अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने पूछा कि भारत में वे यह जिद क्यों करना चाहते हैं? वे कहते हैं कि हमें मस्जिदों में जगह नहीं मिलती तो हम सड़क पर उतरते हैं। जब गुरुग्राम में 38 जगह सड़के रोक कर नमाज पढ़ी जाती थी तब, समाज को गुस्सा आया और इसे रोकने के लिए आंदोलन हुए। उस समय मीडिया ने दिखाया था कि गुरुग्राम से 40 किलोमीटर दूर से ट्रकों में चटाइयां लाई जा रही हैं, लोग लाए जा रहे हैं।रास्ते में पड़ने वाली बीसियों मस्जिदें खाली रहती थीं।
उन्होंनेे कहा कि इससे स्पष्ट है कि यह तर्क केवल धोखा देने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। वास्तव में तो यह एक शक्ति प्रदर्शन है। वे प्रशासन और हिंदू समाज को अपना संख्या बल दिखाकर आतंकित करना चाहते हैं। विश्व हिंदू परिषद सभी राज्य सरकारों से अपील करती है कि वे सख्ती से सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा न्यायपालिका और संविधान का पालन करने के लिए सबको प्रेरित करें। किसी भी तरह से सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुल्ला - मौलवियों को भी चाहिए कि वे मुस्लिम समाज को कानून का पालन करने की प्रेरणा दें, ना कि उन्हें आतंकवाद के एक और मार्ग पर धकेलें।