नेपाल की बालेन्द्र सरकार को झटका, राष्ट्रपति ने सभी छह अध्यादेश रोके, परामर्श के बाद लेंगे फैसला

Posted on: 2026-04-30


काठमांडू, 30 अप्रैल। नेपाल के राष्ट्रपति ने बालेन्द्र सरकार को झटका दिया है। 30 अप्रैल से आहूत संसद सत्र के स्थगन के मध्य सरकार ने राष्ट्रपति से एक साथ 6 अध्यादेशों को हरी झंडी प्रदान करने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने फिलहाल सभी अध्यादेश को रोक लिया है। वो संवैधानिक विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बाद ही कोई फैसला करेंगे। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, इसके लिए आज शाम चार बजे संवैधानिक विशेषज्ञों को शीतल निवास बुलाया गया है।

यह अध्यादेश सार्वजनिक निकायों में नियुक्तियों को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने, दलीय राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त करने, सार्वजनिक निर्माण कार्यों को तेज करने, सहकारी संस्थाओं के छोटे बचतकर्ताओं की रकम वापस दिलाने तथा भूमि, मालपोत और नापी जैसी सेवाओं को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संबंधित हैं। इन अध्यादेशों में संवैधानिक परिषद (कार्य, कर्तव्य, अधिकार और कार्यविधि) संबंधी ऐन, 2066 में संशोधन, सहकारी ऐन, 2074 में संशोधन, विश्वविद्यालय और स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानों से संबंधित कुछ कानूनों में संशोधन, अतीत में राजनीतिक रूप से नियुक्त सार्वजनिक पदाधिकारियों को पदमुक्त करने के लिए विशेष व्यवस्था, तथा सार्वजनिक खरीद ऐन, 2063 में संशोधन शामिल हैं।

राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार किरण पोखरेल ने बताया कि संवैधानिक परिषद से संबंधित अध्यादेश के कारण राष्ट्रपति असमंजस में हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले, संसद द्वारा पारित एक विधेयक को भी राष्ट्रपति ने पुनर्विचार के लिए वापस भेजा था। अध्यादेश में यह प्रस्ताव है कि परिषद के 6 सदस्यों में से 3 सदस्य मिलकर निर्णय ले सकते हैं। जबकि पहले राष्ट्रपति ने इसी प्रावधान को संवैधानिक और लोकतांत्रिक मान्यताओं के अनुरूप बहुमत की आवश्यकता बताते हुए विधेयक को वापस कर दिया था।